छत्तीसगढ़
सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी, 4 आरोपी गिरफ्तार
Shantanu Roy
4 Oct 2025 7:02 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपए की वसूली करने और फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने वाले चार आरोपियों को दुर्ग पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। यह मामला खाद निरीक्षक, पर्यवेक्षक, चपरासी जैसे पदों के लिए जाली नियुक्ति आदेश बनाने और लोगों को ठगने से संबंधित है। प्रार्थी दीपेश कुमार निषाद (26 वर्ष) निवासी महमरा ने 2 अक्टूबर 2025 को थाना पुलगांव (अंजोरा) में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि उनके गांव के मनोज साहू अपने साथी मुकेश वर्मा और भांजे रजत वर्मा के साथ मिलकर खाद निरीक्षक के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से रकम वसूल रहे थे। प्रार्थी ने बताया कि आरोपियों ने उनसे नौकरी दिलाने के लिए चार लाख रुपए की मांग की और दो लाख रुपए नगद तथा शेष ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर लिए।
इसके साथ ही आरोपियों ने फर्जी नियुक्ति आदेश व्हाट्सएप के माध्यम से भेजकर विश्वास दिलाया कि नौकरी सुनिश्चित हो गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुखनंदन राठौर ने बताया कि शिकायत के आधार पर थाना पुलगांव में अपराध क्रमांक 420/2025 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों की पतासाजी की और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई लोगों से सरकारी नौकरी के नाम पर रकम वसूली की और फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र थमाकर धोखाधड़ी की। विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले के मास्टर माइंड मनोज कुमार साहू से लोगों को दिए गए फर्जी नियुक्ति पत्र, अन्य कागजात और मोबाइल जप्त किए। इसके साथ ही रजत वर्मा और मुकेश वर्मा से फर्जी दस्तावेज और मोबाइल जब्त किए गए। इस जालसाजी में शामिल टाइपिंग सेंटर संचालक महेश हिरावं को सेक्टर 6, भिलाई ए मार्केट से गिरफ्तार किया गया।
चारों आरोपियों के विवरण इस प्रकार हैं:
मनोज कुमार साहू, 40 वर्ष, अंजोरा, पुलगांव।
रजत वर्मा, 25 वर्ष, भिलाई नगर।
मुकेश वर्मा, 53 वर्ष, भिलाई नगर।
महेश हिरावं, 63 वर्ष, हरिनगर, मोहन नगर।
एसपी राठौर ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि आरोपियों द्वारा विभिन्न पदों के लिए लोगों को आकर्षित किया गया और लाखों रुपए की ठगी की गई। आरोपियों ने अपने आप को सरकारी एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश किया और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से लोगों को नौकरी मिलने का भरोसा दिलाया। पुलिस ने बताया कि मनोज कुमार साहू इस गिरोह का प्रमुख सदस्य था, जिसने धोखाधड़ी का पूरा नेटवर्क तैयार किया। रजत और मुकेश वर्मा ने मोबाइल और फर्जी कागजात के जरिए लोगों को प्रभावित किया और पैसे वसूले। महेश हिरावं ने फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने का काम किया और अन्य आरोपियों को सपोर्ट प्रदान किया। फिलहाल, आरोपियों से जप्त दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जालसाजी के और भी पीड़ित हो सकते हैं और उनका पता लगाने के लिए व्यापक जांच की जा रही है। उन्होंने आम नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे देने से पहले पूरी तरह जांच करें और फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र या ऑनलाइन वसूली करने वाले गिरोह से सावधान रहें।
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